मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

कांग्रेस की परेशानी

 कांग्रेस की परेशानी अब दिनों दिन बढती जा रही है /   एकाध सालों में कांग्रेस के नेता जिस तरीके से कांग्रेस की नैया चला रहे हैं उससे तो साफ़ पता चल रहा है कि पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों  में इनकी नाव  डूबने  वाली है /  जिस तरीके से कांग्रेस के नेता भ्रष्टाचार पर स्टैंड लेते रहे हैं वह उनकी पार्टी के   लिये  शुभ नहीं है /  अब देखिये  अन्ना हजारे के अनशन वाले मुद्दे को कांग्रेस के नेताओं  ने कैसे हलके ढंग से लिया और कांग्रेस की  भद पिट  गई /  कांग्रेस की सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि उसका मुखिया एक  ईमानदार  छवि वाला व्यक्ति है पर उसका उसके बेईमान सिपहसालारों पर कोई वश नहीं है /  सब भ्रष्टाचार की फसल काटने में अपनी भूमिका निभा चुके हैं /  उनके जो  युवराज हैं , जिन्हें भावी प्रधानमंत्री का  ओहदा मिलनेवाला है वे अभी भारतीय  राजनीति का ककहरा सीख  रहे हैं / ऐसी बात नहीं है कि वे राजनीति में बिलकुल  अनाडी हैं बल्कि राजनीति तो उन्हें विरासत में मिली है पर उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना है /

अब कल अन्ना ने एक नया अल्टीमेटम कांग्रेस को पकड़ा दिया है   कि बिल नहीं तो वोट नहीं / उन्होनें साफ़ साफ़ कह दिया है कि अगर  जन लोक पाल  विधेयक नहीं लाये तो चुनाव में कांग्रेस का विरोध करेंगे / कांग्रेस की आफत यह है कि अभी  आम जनता  भी कांग्रेस से थोडा रुष्ट है  क्योंकी  बढती हुई महंगाई ने उसकी कमर तोड़ दी है और वह देख रही है कि सरकार इस महंगाई को काबू में लाने  के लिये  कोई खास कदम नहीं उठा रही है/  ऊपर से उसके मंत्रियों के  बयान आग में घी का काम कर रहे हैं / अभी गरीबी की जो सीमा -रेखा  तय की गई है सरकार के द्वारा उससे सरकार की  अच्छी खासी फजीहत हुई है /  कांग्रेस की आलाकमान को अब जागना ही पड़ेगा नहीं तो कांग्रेस की   लुटिया कांग्रेस के नेता ही डूबा देंगे /

शनिवार, 17 सितंबर 2011

नरेन्द्र मोदी का नया अवतार

आज से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी तीन दिनों के लिये अनशन पर बैठकर एक नई  राजनीतिक बिसात बिछा  चुके हैं / उन्होंने इस अनशन को शुद्धिकरण का नाम दिया है पर राजनीतिक   हलकों में इसके कुछ और अर्थ लगाये जा रहे हैं /  तीन दिनों के अनशन के बाद नरेन्द्र मोदी का क्या नया अवतार होगा ? कहीं इसके पीछे कहीं कोई राजनीतिक मंशा तो नहीं छिपी है ?  वैसे भी इन राजनीतिक  नेताओं के हर  कार्यकलापों के पीछे कोई न कोई राजनीतिक  चालें  छिपी रहती हैं /  अभी इन नाटकों को देखकर लगता है कि देश में अनशनों का फैशन चल पड़ा है / अनशन जैसे कारगार हथियार का अगेर इसी तरह   इस्तेमाल    होता रहा तो यह हथियार भी एकदिन भोथरा हो जायेगा /

सोमवार, 5 सितंबर 2011

गाँव

गाँव , तुम कहाँ खो गए ?
बरसों जहाँ तुम्हें छोड़ आई थी
तुम वहां तो नहीं हो !

                 पर
मेरी  स्मृति के  उजले  पन्नों पर
            इतिहास
के पुराने खंडहरों की तरह दर्ज हो /

जहाँ अवकाश पाते  ही
मन लम्बी छुट्टियों पर चला जाता है
तलाशने लगता है
कुछ विस्मृत हुए लोगों को /
दोहराने लगता है
कुछ भूले हुए किस्सों को
भूले हुए अनगिनत  चेहरे
फ़िल्म की रील की तरह
चलने लगते हैं /

बूढी आजी , बाबा , वह महुआ का पेड़
आम का बगीचा , माटी  की सोंधी गंध
वह चार बीघा खेत, वह अपना  आँगन , वह दुआर /

कहते हैं लोग कि
अब तुम  नहीं रहे
पर  विश्वास नहीं होता
गांव  तुम मर नहीं सकते /

हर पल तो तुम्हें
अपने सीने में  धड़कता  हुआ पाती हूँ
कैसे कहूँ कि तुम  नहीं रहे ?

शनिवार, 3 सितंबर 2011

मुबारकें

  तेरे दिल में कोई और घर कर  गया
  तुझसे कैसे अब मैं मुबारकें लूँ ?
  कभी मंजिल हमारी एक थी
    आज  राहें  जुदा हैं

तू रह अपने हमसफ़र के  साये में 
मैं भी अब तनहा एक सफ़र में हूँ /

तू मुबारकों में रह  आमीन
मैं अभी  बद्ददुआवों  के  सायों में हूँ/

तू  चलाचल  अपनी  आरजूओं की मिन्नत में
 ख्वाहिशों की बंदगी  कर
मैं अभी जिंदगी  वीराने के बसर में हूँ /

शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी भूमिका ?

आज देश  भ्रष्टाचार के खिलाफ संजीदा हो उठा है /  ६४ सालों में पहली बार ऐसा हो रहा है कि अन्ना  की  वजह से  पूरा देश   भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए कमर  कस कर खड़ा  है / यह एक शुभ संकेत है /  पर यह भी ध्यान में रखना जरुरी है कि यह  लड़ाई सिर्फ अन्ना  की नहीं है   बल्कि  इसके लिए हम सभी को अपने आचरण में तबदीली लानी होगी / सिर्फ कानून बना देने से भ्रष्टाचार का राक्षस  खत्म नहीं होगा /  इस देश में कानून की  धज्जियां जिस तरीके से उड़ाई जाती हैं उसको देखकर ऐसा नहीं लगता कि सिर्फ  एक मजबूत लोकपाल बना कर हम भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर देंगे / वैसे अन्ना खुद कह भी रहे हैं कि इस  लोकपाल से केवल ६० प्रतिशत भ्रष्टाचार खत्म होगा / जब तक हिंदुस्तान  के लोगों की मानसिकता बदलती नहीं है तब तक यह लड़ाई अपने असली मुकाम पर नहीं  पहुंचेगी / भ्रष्टाचार के लिए केवल नेता ही दोषी नहीं हैं बल्कि हर वह आदमी दोषी है जो अपना काम निकालने  के लिए दो नम्बरी रास्तों का सहारा लेता है /  हममें से शायद ही कोई ऐसा हो जिसने भ्रष्टाचार को बढ़ावा  देने में अपनी कोई भूमिका का निर्वाह न किया हो /  एक तरफ हम भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए नारे लगा रहे हैं , अन्ना के साथ रहने का वादा कर रहे हैं , सरकार को सोचने पर मजबूर कर रहे हैं , सभी  राजनीतिक   दलों के चेहरों से  मुखोटे हटा रहे हैं पर इस लड़ाई में सिर्फ इतना ही करने से भ्रष्टाचार नहीं मिटेगा /


अन्ना तो अपनी भूमिका का निर्वाह बड़ी ईमानदारी  से कर रहे हैं पर यह सवाल हमारे सामने खड़ा है कि क्या हम  अपने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी बरतेंगे ?

मंगलवार, 23 अगस्त 2011

दो हाथियों की लड़ाई -उदयप्रकाश

          दो हाथियों का
             लड़ना
सिर्फ दो हाथियों के समुदाय से
     सम्बन्ध नहीं रखता /

दो हाथियों की लड़ाई में
सबसे ज्यादा कुचली जाती है
घास , जिसका
हाथियों के समूचे कुनबे से
कुछ भी लेना-देना नहीं/

जंगल से भूखी लौट जाती है
           गाय
और भूखा सो जाता है
घर में बचा

दो हाथियों   के
 चार  दांतों  और आठ पैरों द्वारा
सबसे ज्यादा  घायल होती है
बचीय  बचचे की नींद ,
सबसे अधिक असुरक्षित होता है
हमारा भविष्य /
दो हाथियों की लड़ाई में
सबसे  ज्यादा
टूटते हैं पेड़

सबसे ज्यादा मरती हैं
चिड़ियाँ ,
जिनका हाथियों के पूरे  कबीले से कुछ भी
लेना - देना नहीं
दो हाथियों की
लड़ाई को
हाथियों से ज्यादा
सहता है जंगल /
और इस लड़ाई में
जितने घाव बनते हैं
हाथियों के  उन्मत्त शरीरों पर
उससे कहीं ज्यादा
गहरे घाव
बनते हैं जंगल और समय
की छाती पर/
जैसे भी हो
दो हाथियों को
लड़ने से रोकना चाहिए /

अन्ना के आगे झुकी सरकार

आखिरकार कुम्भकर्णी सरकार की नींद टूटी और जागते ही समझौते के  लिए  कवायद शुरू हो गई है /  अब देखिए यह समझौता किन- किन  शर्तों पर होता है ? सरकार की नीयत से अन्ना  वाकिफ हैं इसलिए उन्होंने साफ- साफ कह दिया है कि जब तक सरकार  लिखित अश्वासन नहीं दे देती तब तक  सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता है / अभी सरकार और सिविल सोसाइटी के बीच बातचीत का पहला दौर खत्म हुआ है   / कल भी यह  प्रक्रिया जारी रहेगी /  सोचने वाली बात है कि अभी  तक सरकार हाथ पर हाथ  धरे बैठे रही / उसने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार नहीं किया जिसका  परिणाम यह हुआ कि सरकार  को इस मामले में मुँह की खानी पड़ी / फजीहत तो हुई ही /  कांग्रेस को इस बात का श्रेय देना चाहिए कि उसने  आजादी के बाद संपूर्ण क्रांति के आन्दोलन को भी हवा दी  तथा आजादी के ६४ वर्ष बाद  फिर से देश को एकजुट हो जाने के  लिए माहौल तैयार किया/ अन्ना  को नायक बनाने के पीछे कांग्रेस की गलत नीतियाँ और उसके बड़बोले नेता बहुत हद तक   जिम्मेदार  हैं /


अन्ना ने सचमुच बड़ी बहादुरी और दिलेरी का काम किया है  / अन्ना  तुमने उम्र के इस पड़ाव पर हिंदुस्तान को गहरी नींद से तो जगाया ही /  पर इस जागरण में कितने लोग जगे रहेंगे  और कितने वापस जल्दी से सो जाएंगे ? यह तो समय बताएगा/  जो भी  हो हम आपके जल्दी से स्वस्थ होने की    दुआ  मांगते हैं ताकि आप की दहाड़ सुनकर गूंगी और बहरी सरकार जगी रहे /