बुधवार, 18 दिसंबर 2013

प्यार ...

दस - बारह साल बाद 
मुझे याद आया था 
कि 
मेरी जिंदगी नर्क बन चुकी है 

अफ़सोस ......
ऐसा क्यूँ हुआ .....?
कैसे हुआ ...? 
समझ ही नहीं पाया मैं ..../

अचानक एक शब्द उछला...
प्यार "
हाँ ,  हाँ , यही है वह 
जो मुझे घुन की तरह चाता  रहा 
इसने मेरी साँसें छीन ली थी /

अब मैं तैयार हूँ 
मुझे मेरे शत्रु  की पहचान हो गई है 
अब यह मेरे लिए 
........ कुछ  डॉट है /

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